आंदोलन को निगलती राजनैतिक महत्वाकांक्षा

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सरकारी कारगुजारियों से परेशान हो स्वतंत्रता के बाद भारत मे ३ ऐसे आंदोलन हुए जिन्होने सत्ता परिवर्तन किये हैं, और तीनो बार ही सत्ता परिवर्तन आंदोलनों के द्वारा जनजागरण कर के संभव हो सके. ७० के दशक अंत मे हुआ सत्ता परिवर्तन जेपी के संपूर्ण क्रांति के आह्वान के आंदोलन द्वारा, १९८९ मे बोफोर्स कांड और भ्रष्टाचारियों के बचाव के प्रयासों से त्रस्त हो वीपी सिंह के आंदोलन द्वारा और १९९९ मे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के आंदोलन ने ऐसा ऐसा संभव किया, किंतु सत्ता परिवर्तन के बाद भी भारतीय जनमानस त्रस्त ही रहाइन आंदोलनों का तात्कालिक परिणाम सत्ता परिवर्तन के रूप मे दिखा किंतु इन्हीं आंदोलनो को सीढी बना कर अनेको व्यक्तियों ने स्वयं को राजनैतिक पटल पर स्थापित किया.

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4 Responses to आंदोलन को निगलती राजनैतिक महत्वाकांक्षा

  1. Shailndra Singh Tomar कहते हैं:

    किशोर जी बहुत बढ़िया लिखा है, एक एक शब्द को चुन चुनकर लिखा है, मेरे जैसे लोगों के लिए तो ये एक अध्याय के सामान है जिसे बार बार पढ़ा जाना चाहिए | एक सुझाव है, अगर भाषा थोड़ी सरल होगी तो पढाने में सुविधा होगी | शैलेन्द्र सिंह तोमर

  2. Suresh Chiplunkar कहते हैं:

    पूरे विस्तार और तथ्यों के साथ लिखा गया शानदार लेख… संग्रहणीय। जब तक किसी आंदोलन में राजनीति और संगठन की बैकिंग ना हो, वह सफ़ल नहीं हो सकता…। जनलोकपाल आंदोलन की असफ़लता का एक कारण यह भी था कि इसने शुरु से मौजूद राजनैतिक व्यवस्था के प्रति हिकारत की निगाह रखी… और संदिग्ध लोग इसमें जुड़ते गए…

  3. Raju कहते हैं:

    सर्वप्रथम IAC पेज वापस पाने के लिये बधाई किशोर जी. आपने विस्तार से सचाई उकेरी है. मेरे विचार से केजरीवाल जी IAC पेज हड़पने में कैसे कामयाब हुये थे इस पर भी आपको प्रकाश डालना चाहिये था. क्या यह काम उन्होंने अपने बल-बूते किया था या इसमें सरकार या किसी राजनैतिक दल ने उनकी सहायता की थी? केजरीवाल जी को यह आत्मविश्वास क्योंकर था कि जिस फ़ेसबुक पेज की बदौलत अन्ना आंदोलन परवान चढ़ा, अपने राजनैतिक कॅरियर के शुरुआत में ही उसी का अपहरण करके वे बेदाग बच जायेंगे? यह रहस्य सबके सामने आना बहुत जरूरी है.

  4. Raju कहते हैं:

    सर्वप्रथम IAC पेज वापस पाने के लिये बधाई किशोर जी. आपने विस्तार से सचाई उकेरी है. मेरे विचार से केजरीवाल जी IAC पेज हड़पने में कैसे कामयाब हुये थे इस पर भी आपको प्रकाश डालना चाहिये था. क्या यह काम उन्होंने अपने बल-बूते किया था या इसमें सरकार या किसी राजनैतिक दल ने उनकी सहायता की थी? केजरीवाल जी को यह आत्मविश्वास क्योंकर था कि जिस फ़ेसबुक पेज की बदौलत अन्ना आंदोलन परवान चढ़ा, अपने राजनैतिक कॅरियर के शुरुआत में ही उसी का अपहरण करके वे बेदाग बच जायेंगे? यह रहस्य सबके सामने आना बहुत जरूरी है.

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